प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार, ओडिशा तट के पास प्रलय मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया, जो यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल का हिस्सा था। रिपोर्ट में रक्षा मंत्रालय के हवाले से बताया गया है कि परीक्षण के सभी निर्धारित उद्देश्य पूरे हुए, हालांकि परीक्षण की तारीख को लेकर लेख में अलग-अलग जानकारी दी गई है।
डीआरडीओ ने विकसित की है प्रलय
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रलय को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ ने विकसित किया है। यह ठोस ईंधन वाली, सतह से सतह पर मार करने वाली क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है। लेख में इसकी मारक क्षमता 150 से 500 किलोमीटर बताई गई है।
प्रभात खबर ने प्रलय की पेलोड क्षमता 500 से 1,000 किलोग्राम बताई है। मारक दूरी और पेलोड के ये आंकड़े उसी रिपोर्ट में दिए गए हैं। सफल परीक्षण और निर्धारित उद्देश्यों के पूरा होने की जानकारी भी रिपोर्ट में रक्षा मंत्रालय के हवाले से दी गई है।
सेना में शामिल करने की प्रक्रिया करीब
लेख के अनुसार, प्रलय को सेना में शामिल करने की प्रक्रिया करीब है। हालांकि, रिपोर्ट में यह नहीं कहा गया है कि मिसाइल की तैनाती पूरी हो चुकी है। इसलिए सफल परीक्षण की सूचना को सेना में उसकी तैनाती पूरी होने की पुष्टि नहीं माना जा सकता।
परीक्षण को यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल का हिस्सा बताया गया है। उपलब्ध जानकारी में इस चरण के सभी निर्धारित उद्देश्य पूरे होने का उल्लेख है, लेकिन सेना में शामिल किए जाने या तैनाती पूरी होने की कोई निश्चित तारीख नहीं दी गई है।
परीक्षण की तारीख पर स्पष्टता नहीं
रिपोर्ट की शुरुआत में अंतिम यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल की तारीख 5 नवंबर बताई गई है, जबकि आगे सफल परीक्षण के लिए 6 नवंबर का उल्लेख है। यह स्पष्ट नहीं है कि ये दो अलग परीक्षण थे या लेख में तारीख संबंधी असंगति है।
इस वजह से उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर परीक्षण की एक निश्चित तारीख तय नहीं की जा सकती। फिलहाल स्रोत की जानकारी सफल परीक्षण, मिसाइल की बताई गई क्षमताओं और उसे सेना में शामिल करने की प्रक्रिया करीब होने तक सीमित है।
स्रोत
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