मौलिक काल्पनिक बाल कहानी — वास्तविक घटना नहीं।
Voice of Paws के लिए, Stray Insight Foundation के सहयोग से प्रस्तुत यह काल्पनिक कहानी है दस साल की ईरा, एक घूमती फिरकी और गली के कुत्ते बादल की।
१. फिरकी की नई पड़ोसी
तीस अक्टूबर की सुबह ईरा अपने मोहल्ले के पुस्तकालय की खिड़कियों पर कागज़ की फिरकियाँ लगा रही थी। रविवार को वहाँ ‘हवा का नक्शा’ प्रदर्शनी लगनी थी। जिस खिड़की पर फिरकी सबसे तेज़ घूमती, नक्शे में उसके आगे बड़ा नीला तीर बनता।
तीसरी खिड़की के नीचे एक भूरा सड़क का कुत्ता गोल होकर बैठा था। उसकी पीठ पर सफेद धब्बा देखकर ईरा ने मन ही मन नाम रखा—बादल। वह फिरकी दिखाने आगे बढ़ी, लेकिन पुस्तकालय की मीना दीदी ने धीरे से रोक लिया।
“हम इसे अभी नहीं जानते,” उन्होंने कहा। “अनजान या डरे हुए जानवर के पास कभी किसी बड़े की सलाह और निगरानी के बिना नहीं जाना चाहिए। पहले यहीं से देखें।”
ईरा रुक गई। बादल ने सिर उठाया, दोनों को देखा और दूसरी तरफ मुँह कर लिया। “शायद अभी उसे हमारा साथ नहीं चाहिए,” दीदी बोलीं। ईरा ने फिरकी नीचे कर ली। बादल को उसकी दोपहर की नींद वापस मिल गई।
२. नक्शे में एक खाली जगह
अगले कुछ दिनों तक ईरा दीदी के साथ खिड़कियाँ नापती रही। बादल कभी पेड़ के नीचे मिलता, कभी बंद चाय की दुकान के पास। ईरा उसे पुकारकर नहीं बुलाती, न पीछे जाती। वह बस अपनी कॉपी में हवा के तीर बनाती।
एक दिन दीदी ने पुस्तकालय की दीवार के पास पानी का साफ कटोरा रखा। रास्ता खुला था और कटोरा बादल से दूर। “अब हम हट जाते हैं,” उन्होंने कहा। कुछ देर बाद बादल अपनी मर्ज़ी से आया और पानी पीकर चला गया। कटोरा रोज़ साफ करने की जिम्मेदारी दीदी ने ली।
प्रदर्शनी से पहले बच्चों ने तीसरी खिड़की के नीचे बड़े गत्ते का पहाड़ रखने का फैसला किया। ईरा ने तुरंत नक्शा देखा। “लेकिन यहाँ तो बादल अक्सर आराम करता है। और पहाड़ से आने-जाने की जगह भी कम होगी।”
सबने गत्ता दूसरी दीवार पर सरका दिया। खाली जगह देखकर उसका दोस्त कबीर बोला, “यहाँ क्या दिखाएँगे?”
“खाली जगह भी काम की होती है,” ईरा ने कहा। उसने नक्शे पर छोटा हरा चौकोर बनाया और लिखा—‘आराम की जगह: दूर से देखें।’
३. बिना छुए वाली दोस्ती
रविवार को पुस्तकालय में फिरकियाँ घूम रही थीं। तीसरी वाली सबसे तेज़ थी—फर्रर्र! बच्चे नीले तीर गिन रहे थे कि बादल आकर अपनी पुरानी जगह बैठ गया।
कबीर खुशी से उसकी तरफ बढ़ने लगा। ईरा ने धीमे स्वर में कहा, “चलो, मीना दीदी के पास खड़े होकर देखें। उसे घेरना नहीं है।” बच्चों ने रास्ता खाली रखा। कोई सीटी नहीं बजा रहा था, कोई उसे छूने की कोशिश नहीं कर रहा था।
ईरा दीदी के पास बेंच पर बैठ गई। थोड़ी देर बाद बादल उठा, आसपास सूँघा और बेंच से कुछ दूरी पर लेट गया। ईरा के हाथ उसे सहलाने को मचले, पर उसने उन्हें अपनी गोद में रहने दिया। दीदी मुस्कराईं। “पास आकर बैठना, छूने की इजाज़त देना नहीं होता।”
प्रदर्शनी खत्म हुई तो ईरा ने अपने नक्शे में एक आखिरी निशान बनाया—बेंच के पास छोटा भूरा बादल।
“तुम्हारा दोस्त?” कबीर ने पूछा।
“शायद बन रहा है,” ईरा बोली। “आज उसने खुद हमारे पास बैठना चुना।” बाहर फिरकी घूमी। बादल ने लंबी जम्हाई ली, और ईरा ने अपनी खुशी धीमी आवाज़ में दीदी को सुनाई।
Voice of Paws — Stray Insight Foundation के सहयोग से। यह मौलिक काल्पनिक कहानी है, वास्तविक घटना नहीं। सामग्री में AI की सहायता ली जा सकती है। चित्र AI द्वारा निर्मित सांकेतिक चित्र है।