बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इंग्लैंड के अस्पतालों के आपातकालीन विभागों में गंभीर रूप से बीमार बच्चों की तेजी से बिगड़ती स्थिति पहचानने के लिए नई चेतावनी प्रणाली शुरू की जा रही है। नेशनल पीडियाट्रिक अर्ली वॉर्निंग सिस्टम के तहत शारीरिक संकेतों की जांच और स्कोर के साथ कर्मचारियों, माता-पिता, देखभालकर्ताओं तथा खुद बच्चे की चिंता को भी देखभाल बढ़ाने का आधार बनाया जाएगा।
किन संकेतों की जांच होगी और स्कोर का क्या मतलब है
बीबीसी के अनुसार, इस व्यवस्था में कर्मचारी बच्चे के रक्तचाप, हृदय गति और ऑक्सीजन स्तर जैसे महत्वपूर्ण संकेतों की जांच करेंगे। इन संकेतों को दर्ज किया जाएगा और उनकी ग्रेडिंग होगी। इस तरह व्यवस्था में केवल जांच करना ही नहीं, बल्कि जांच से मिली जानकारी को रिकॉर्ड करना और उसके आधार पर स्कोर तैयार करना भी शामिल है। इसका उद्देश्य गंभीर रूप से बीमार बच्चों की तेजी से बिगड़ती हालत पहचानना है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि कुल स्कोर अधिक होने पर बच्चे को अधिक तत्काल देखभाल की जरूरत मानी जाएगी। यानी स्कोर का संबंध इस बात से होगा कि बच्चे की देखभाल कितनी जल्दी बढ़ाई जानी है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में स्कोर की अलग-अलग सीमाएं या प्रत्येक संकेत को दिए जाने वाले अंक नहीं बताए गए हैं। इसलिए इस विवरण के आधार पर किसी खास बच्चे के लिए स्कोर या देखभाल का स्तर तय नहीं किया जा सकता।
यह खबर प्रणाली शुरू किए जाने के बारे में है, उसके नतीजे सामने आने के बारे में नहीं। उपलब्ध विवरण यह बताता है कि कर्मचारियों को क्या जांचना और दर्ज करना होगा, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि आपातकालीन विभागों में इसके इस्तेमाल से कितने बच्चों की बिगड़ती स्थिति पहले पहचानी जा सकेगी।
सिर्फ अंक नहीं, परिवार और बच्चे की चिंता भी अहम
इस प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा चिंता व्यक्त किए जाने पर कार्रवाई का प्रावधान है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों, माता-पिता, देखभालकर्ताओं या स्वयं बच्चे की चिंता पर देखभाल का स्तर तुरंत बढ़ाया जाएगा। इस तरह व्यवस्था में दर्ज शारीरिक संकेतों के अलावा बच्चे की स्थिति को लेकर व्यक्त की गई चिंता के लिए भी जगह रखी गई है।
यह प्रावधान स्कोर वाली प्रक्रिया से अलग समझना जरूरी है। उपलब्ध विवरण में एक ओर अधिक कुल स्कोर को अधिक तत्काल देखभाल की जरूरत से जोड़ा गया है, वहीं दूसरी ओर संबंधित लोगों की चिंता पर तुरंत देखभाल बढ़ाने की बात कही गई है। हालांकि, रिपोर्ट के उपलब्ध अंश में यह स्पष्ट नहीं है कि चिंता दर्ज करने की प्रक्रिया क्या होगी या देखभाल बढ़ाने के बाद कौन-कौन से कदम उठाए जाएंगे।
इसलिए इस व्यवस्था को केवल रक्तचाप, हृदय गति और ऑक्सीजन स्तर की अंकों वाली सूची के रूप में बताना अधूरा होगा। रिपोर्ट में परिवार, देखभालकर्ताओं, कर्मचारियों और बच्चे की चिंता पर कार्रवाई भी इसका हिस्सा है। साथ ही, इस प्रावधान के व्यवहार में लागू होने के परिणामों की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
वार्डों में पहले से उपयोग, असर के आंकड़े उपलब्ध नहीं
बीबीसी के अनुसार, इंग्लैंड के 90 से अधिक अस्पताल बच्चों के वार्डों में इस चेतावनी प्रणाली का पहले से उपयोग कर रहे हैं। अब इसे अस्पतालों के आपातकालीन विभागों में शुरू किया जा रहा है। बच्चों के वार्डों में पहले से इस्तेमाल और आपातकालीन विभागों में इसकी शुरुआत, रिपोर्ट में दी गई दो अलग जानकारियां हैं।
इस प्रणाली को एनएचएस इंग्लैंड, रॉयल कॉलेज ऑफ पीडियाट्रिक्स एंड चाइल्ड हेल्थ और रॉयल कॉलेज ऑफ नर्सिंग के सहयोग से विकसित किया गया है। हालांकि, उपलब्ध सामग्री में इसकी प्रभावशीलता का कोई शोध-आधारित आंकड़ा, पहले और बाद के परिणामों की तुलना या गलत चेतावनियों का विवरण नहीं दिया गया है।
इसलिए अभी रिपोर्ट से प्रणाली की कार्यप्रणाली और उसके इस्तेमाल के दायरे की जानकारी मिलती है, सफलता का मापा हुआ प्रमाण नहीं। वार्डों में इसके उपयोग की संख्या को अपने आप बेहतर स्वास्थ्य परिणाम का प्रमाण नहीं माना जा सकता। यह विवरण बीबीसी की रिपोर्ट पर आधारित है; इसके परिणामों की स्वतंत्र पुष्टि यहां उपलब्ध नहीं है।
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