जानकारीपरक फीचर — यह नई या ब्रेकिंग घटना की रिपोर्ट नहीं है। शारीरिक सक्रियता की बात आते ही अक्सर जिम, दौड़ या खेल का खयाल आता है। लेकिन स्वास्थ्य को समझने के लिए एक दूसरा सवाल भी जरूरी है: जागते हुए हमारा कितना समय बैठकर, टिककर या लेटकर बीतता है? विश्व स्वास्थ्य संगठन की तथ्य-पत्रिका बताती है कि शारीरिक सक्रियता और कम ऊर्जा खर्च करने वाला बैठा-बैठा व्यवहार अलग अवधारणाएं हैं।
सक्रियता का दायरा जिम से कहीं बड़ा
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, कंकालीय मांसपेशियों से होने वाली ऐसी कोई भी शारीरिक गति, जिसमें ऊर्जा खर्च होती है, शारीरिक सक्रियता है। इसमें केवल तय समय पर किया गया व्यायाम नहीं, बल्कि आने-जाने, कामकाज, घरेलू गतिविधियों और खाली समय में होने वाली हलचल भी शामिल है। पैदल चलना, साइकिल चलाना, पहियों वाली कुर्सी से आगे बढ़ना, खेलना और मनोरंजन के लिए सक्रिय रहना इसके उदाहरण हैं।
इसके बरक्स ‘सेडेंटरी बिहेवियर’ का अर्थ है जागते समय बहुत कम ऊर्जा खर्च करने वाला व्यवहार—जैसे बैठे रहना, टिककर बैठना या लेटना। यहां ‘जागते समय’ महत्वपूर्ण है: यह परिभाषा नींद की नहीं है। इसलिए स्वास्थ्य की चर्चा में सिर्फ कसरत का समय गिनना और बाकी दिन की दिनचर्या को नजरअंदाज करना अधूरी तस्वीर दे सकता है।
कम सक्रियता और ज्यादा बैठना एक ही बात नहीं
शारीरिक रूप से अपर्याप्त सक्रिय होने का मतलब अनुशंसित स्तर तक गतिविधि न करना है। वहीं बैठा-बैठा व्यवहार इस बात का वर्णन करता है कि जागते हुए समय कैसे बीत रहा है। इसी अंतर के कारण डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देश गतिविधि बढ़ाने के साथ सभी आयु समूहों में ऐसे निष्क्रिय समय को सीमित करने की बात भी कहते हैं।
तथ्य-पत्रिका के मुताबिक, वयस्कों में अधिक बैठा-बैठा समय हृदय रोग, टाइप-2 मधुमेह और मृत्यु के बढ़े जोखिम जैसे प्रतिकूल नतीजों से जुड़ा पाया गया है। बच्चों और किशोरों में इसका संबंध अधिक शारीरिक वसा, कमजोर फिटनेस और कम नींद से दिखता है। ये शोध में पाए गए संबंध हैं; इनसे किसी व्यक्ति में बीमारी होना निश्चित नहीं माना जा सकता।
मौका मिले, तभी तो बढ़ेगी हलचल
इस मुद्दे को केवल व्यक्तिगत इच्छाशक्ति तक सीमित करना भी ठीक नहीं। डब्ल्यूएचओ बताता है कि परिवहन, स्क्रीन-आधारित काम, शिक्षा और मनोरंजन दिनचर्या को अधिक बैठने वाला बना रहे हैं। सुरक्षित और आनंददायक सक्रियता के अवसर सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों से भी प्रभावित होते हैं।
इसीलिए उसके नीतिगत सुझावों में पैदल और साइकिल आवागमन की सुविधा, सुलभ सार्वजनिक खुले स्थान तथा स्कूलों और कार्यस्थलों पर सक्रियता के अवसर शामिल हैं। मूल संदेश सरल है: हर शारीरिक गतिविधि मायने रखती है, और सक्रिय जीवन के लिए अनुकूल परिवेश भी जरूरी है।
स्रोत
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