बिहिया/आरा, 27 अक्टूबर 2026। भोजपुर जिले के बिहिया में मखदूम बाबा का सालाना उर्स मंगलवार से शुरू हो रहा है। तीन दिनों तक चलने वाला धार्मिक आयोजन 27 से 29 अक्टूबर तक निर्धारित है। स्थानीय समाचार रिपोर्ट के अनुसार मजार परिसर को सजाया गया है और जायरीनों के स्वागत की तैयारियां की गई हैं। दूर-दराज से श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद जताई गई है, हालांकि कार्यक्रम शुरू होने से पहले वास्तविक उपस्थिति का कोई पुष्ट आंकड़ा नहीं है।
पहले दिन क्या कार्यक्रम हैं?
आयोजन से जुड़े लोगों के हवाले से प्रकाशित कार्यक्रम के अनुसार 27 अक्टूबर को सुबह 10 बजे कुरानखानी और बाबा का गुस्ल रखा गया है। 28 अक्टूबर को चादरपोशी की रस्म होने की जानकारी दी गई है। तीसरे दिन 29 अक्टूबर की रात आठ बजे से तकरीर और बाद में धार्मिक रस्मों का कार्यक्रम बताया गया है। आयोजकों की ओर से कार्यक्रम में किसी बदलाव की जानकारी मिलने पर समय की पुष्टि संबंधित स्थल से करना बेहतर होगा।
दरगाह और स्थानीय सांस्कृतिक परंपरा
यह वार्षिक उर्स हजरत सैयद शाह सरफुद्दीन एहिया मनेरी, जिन्हें स्थानीय रूप से मखदूम बाबा कहा जाता है, की स्मृति से जुड़ा है। बिहिया की यह दरगाह स्थानीय सामाजिक और धार्मिक जीवन में लंबे समय से महत्व रखती है। प्रभात खबर की रिपोर्ट में इसे विभिन्न समुदायों की भागीदारी और आपसी भाईचारे से जुड़ा स्थल बताया गया है। दरगाह परिसर में बाबा के शिष्य चुल्लाई यादव की मजार का भी उल्लेख मिलता है।
मेले के लिए भी तैयारियां
मुख्य धार्मिक आयोजन के साथ मेले की तैयारी भी की गई है। रिपोर्ट के अनुसार अस्थायी दुकानों, खान-पान के स्टॉल और झूलों की व्यवस्था की गई है। ऐसे आयोजनों में स्थानीय दुकानदारों और छोटे कारोबारों की भी भागीदारी रहती है। बाजार और आसपास के रास्तों पर सामान्य दिनों से अधिक चहल-पहल रहने की संभावना है, लेकिन किसी आधिकारिक यातायात पाबंदी या बदले हुए रूट की पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।
जायरीनों के लिए उपयोगी बातें
आयोजन में आने वाले लोगों को भीड़ और मौसम को देखते हुए अपनी यात्रा की योजना बनानी चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों के साथ आने पर पानी तथा आवश्यक व्यक्तिगत दवाएं साथ रखना उपयोगी हो सकता है। रास्ते या पार्किंग को लेकर किसी सोशल मीडिया संदेश पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय प्रशासन और आयोजकों की ताजा सूचना को प्राथमिकता दें। श्रद्धालुओं की अनुमानित संख्या को वास्तविक भीड़ का आंकड़ा समझना ठीक नहीं होगा।
तीन दिवसीय उर्स के दौरान कार्यक्रम किस तरह संपन्न होते हैं और कितनी भीड़ पहुंचती है, इसकी तस्वीर आने वाले दिनों में स्पष्ट होगी। फिलहाल पुष्टि यही है कि स्थानीय आयोजन समिति ने 27 से 29 अक्टूबर का कार्यक्रम बताया है और दरगाह परिसर में तैयारियां की गई हैं।
स्रोत
फीचर्ड इमेज सांकेतिक चित्र (एआई द्वारा निर्मित) है। यह आयोजन अथवा व्यक्तियों की वास्तविक तस्वीर नहीं है।