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बिहार में ₹4,092 करोड़ के निवेश प्रस्ताव: 12 कंपनियों से समझौता, गया में औद्योगिक पहल

26 Oct 2026 · admin
बिहार में प्रस्तावित औद्योगिक निवेश के संदर्भ में कारखानों और औद्योगिक परिसर का एआई-निर्मित सांकेतिक चित्र

पटना/गया, 26 अक्टूबर 2026। बिहार में औद्योगिक निवेश बढ़ाने की दिशा में 24 अक्टूबर को बोधगया में एक अहम पहल हुई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में राज्य के उद्योग विभाग और 12 औद्योगिक इकाइयों के बीच कुल 4,092 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश से जुड़े समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इसी कार्यक्रम में बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी गया लिमिटेड (BIMCGL) का औपचारिक शुभारंभ और बिहार बिजनेस कनेक्ट 2027 का कर्टेन रेजर आयोजित हुआ।

किन कंपनियों ने जताई निवेश की रुचि?

बिहार सरकार की आधिकारिक सूचना के मुताबिक सबसे बड़ा प्रस्ताव मिंट लाइफ साइंसेज की ओर से 1,500 करोड़ रुपये का है। एबीआईएस ग्रुप ने 600 करोड़, बायोहील एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड ने 510 करोड़ और जियोफास्ट इंडस्ट्रीज (1) लिमिटेड ने 500 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव रखा है। कुमार ऑर्गेनिक्स का प्रस्ताव 300 करोड़ रुपये और जियाना इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड का 206 करोड़ रुपये का है। अन्य प्रस्ताव ऑटोमोबाइल, वस्त्र, एल्युमिनियम, कृषि आधारित उत्पाद, बायोटेक्नोलॉजी और संबंधित गतिविधियों से जुड़े हैं।

गया के औद्योगिक परिसर की क्या योजना है?

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की 24 अक्टूबर की सूचना के अनुसार, गया का इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर जिले के डोभी प्रखंड में करीब 1,670 एकड़ में विकसित किया जा रहा है। इसे अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर से जोड़ा गया है। इस क्लस्टर में सड़क, बिजली, पानी, अपशिष्ट प्रबंधन और अन्य औद्योगिक सुविधाएं विकसित करने की योजना है। केंद्र की विज्ञप्ति के मुताबिक 12 नए एमओयू लगभग 300 एकड़ औद्योगिक भूमि से संबंधित हैं।

रोजगार को लेकर क्या उम्मीद है?

केंद्र सरकार ने इन 12 समझौतों से 16,095 संभावित रोजगार अवसरों का अनुमान दिया है। हालांकि यह अनुमान है, वास्तविक नियुक्तियों का आंकड़ा नहीं। रोजगार की संख्या इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां निवेश प्रस्तावों को कितनी जल्दी कारखानों और कारोबारी गतिविधियों में बदल पाती हैं। स्थानीय युवाओं के लिए अवसर बढ़ेंगे या नहीं, यह परियोजनाओं की प्रगति, कौशल की जरूरत और भर्ती प्रक्रिया से स्पष्ट होगा।

एमओयू का मतलब तत्काल निवेश नहीं

समझौता ज्ञापन निवेश की प्रस्तावित मंशा को दर्ज करता है। इसे पूरी राशि खर्च हो जाने, उत्पादन शुरू होने या नौकरी मिल जाने के बराबर नहीं माना जा सकता। बिहार सरकार ने नए प्रस्तावों की कुल राशि 4,092 करोड़ रुपये बताई है, जबकि केंद्रीय प्रेस विज्ञप्ति में इसे लगभग 4,200 करोड़ रुपये के रूप में प्रस्तुत किया गया है। दोनों दस्तावेजों में 12 समझौतों की पुष्टि होती है।

अब मुख्य सवाल यह है कि इन प्रस्तावों पर जमीन आवंटन, जरूरी मंजूरियों, निर्माण कार्य और वास्तविक उत्पादन की शुरुआत कब तक होती है। निवेशकों की घोषणाओं को वास्तविक परिणामों में बदलना इस पहल की अगली महत्वपूर्ण परीक्षा होगी।

स्रोत

चित्र: एआई से तैयार सांकेतिक चित्र। यह वास्तविक औद्योगिक परिसर या कार्यक्रम की तस्वीर नहीं है।



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